अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

“'Tis well that intellect remains as guardian to the heart, yet now and then, pray leave the heart to wander all alone.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यह अच्छा है कि बुद्धि दिल की पहरेदार बनकर उसके साथ रहे, लेकिन कभी-कभी दिल को अकेला भी छोड़ देना चाहिए।

विस्तार

यहाँ शायर ने अक़्ल यानी समझदारी को दिल का 'पासबान' या पहरेदार बताया है, जो दिल को बहकने से बचाता है। अक़्ल की यह निगरानी अच्छी बात है, पर हर लम्हा नफ़ा-नुक़सान तौलते रहने से ज़िंदगी की ताज़गी और जज़्बा ख़त्म हो जाता है। इसलिए कभी-कभार उस पहरेदार को हटाकर दिल को आज़ाद छोड़ देना चाहिए, ताकि वह बिना किसी पाबंदी के प्यार, ख़्वाब और अपनी रूहानी उड़ान को महसूस कर सके।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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