मानिंद-ए-ख़ामा तेरी ज़बाँ पर है हर्फ़-ए-ग़ैर बेगाना शय पे नाज़िश-ए-बेजा भी छोड़ दे

“Like a pen, your tongue bears only another's word; abandon this vain pride in what is not your own.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

क़लम की तरह तुम्हारी ज़बान पर भी दूसरों ही की बात है, इसलिए किसी पराई चीज़ पर यह बेवजह का घमंड करना छोड़ दो।

विस्तार

शायर यहाँ एक ख़ूबसूरत मिसाल देता है—जैसे क़लम (ख़ामा) की अपनी कोई सोच नहीं होती और वह वही लिखता है जो कोई और लिखवाना चाहे, वैसे ही तुम्हारी ज़बान पर भी दूसरों के ही अल्फ़ाज़ हैं। यह उन लोगों पर एक बड़ी प्यारी मगर गहरी चोट है जो दूसरों के इल्म या विचारों को अपना समझकर बेवजह इतराने लगते हैं। शेर हमें यह आईना दिखाता है कि पराई चीज़ों पर झूठा घमंड करने के बजाय अपनी मौलिकता और अपनी असली आवाज़ को पहचानना चाहिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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