हवा हो ऐसी कि हिन्दोस्ताँ से ऐ 'इक़बाल' उड़ा के मुझ को ग़ुबार-ए-रह-ए-हिजाज़ करे

“May such a wind arise from Hindustan, O Iqbal, that it sweeps me away to become the dust upon the path to Hijaz.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ऐ इक़बाल, काश ऐसी हवा चले जो मुझे हिन्दुस्तान से उड़ा ले जाए और हिजाज़ के रास्ते की धूल बना दे।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में इक़बाल की दिली तड़प और हिजाज़ (पवित्र भूमि) के प्रति उनका गहरा समर्पण झलकता है। वे किसी भव्य मुसाफ़िर की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसी आंधी की तमन्ना करते हैं जो उन्हें हिंदुस्तान से उड़ाकर उस मुक़द्दस रास्ते की धूल बना दे। इश्क़ में अपनी हस्ती को मिटाकर उस पाकीज़ा राह का ग़ुबार (धूल) बन जाना ही उनके लिए रूहानी सुकून और सबसे बड़ा एज़ाज़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.