साहिब-ए-साज़ को लाज़िम है कि ग़ाफ़िल न रहे
गाहे गाहे ग़लत-आहंग भी होता है सरोश
“The master of melody must not be heedless, For sometimes, even a wrong tune can be a delight.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
संगीत के उस्ताद को लापरवाह नहीं होना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी एक गलत धुन भी आनंददायक हो सकती है।
विस्तार
ये शेर कला और उसकी स्वीकार्यता के बारे में बात करता है। शायर कहते हैं कि एक कलाकार को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए, लेकिन ये एक गहरा विरोधाभास है! कभी-कभी, एक ग़लत सुर या एक छोटी सी चूक भी इतनी गहराई से छूती है कि वह मधुर लगने लगती है। इसका मतलब है कि कला में पूर्णता से ज़्यादा, वह भावना होती है जो दिल को छू जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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