मक़ाम-ए-अक़्ल से आसाँ गुज़र गया 'इक़बाल'
मक़ाम-ए-शौक़ में खोया गया वो फ़रज़ाना
“The station of intellect passed easily for 'Iqbal', But the person lost in the station of passion is Farzana.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अक्ल का पड़ाव 'इक़बाल' से आसानी से निकल गया, पर शौक़ के पड़ाव में वो फ़रज़ाना खो गई।
विस्तार
यह शेर इंसान के अंदर की सबसे बड़ी जंग को दिखाता है—दिमाग और दिल की जंग। शायर कहते हैं कि अक़्ल को छोड़ना भी आसान है, लेकिन जब हम अपने शौक़ या इश्क़ की गहराई में खो जाते हैं, तो निकलना नामुमकिन हो जाता है। यह न सिर्फ़ मोहब्बत की बात है, बल्कि ज़िंदगी के हर उस मोड़ की बात है, जहाँ हमें अपने दिल को काबू करना पड़ता है।
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