जब मैंने सज्दा के लिये सर झुकाया तो ज़मीन से एक आवाज़ आने लगी तेरा दिल तो बुतों के प्रेम ही परिचित है, तुझे नमाज़ से क्या मिलेगा?

“When I bowed my head for prostration, a voice began to emanate from the earth. 'Your heart is only familiar with the love of idols; what will you gain from namaz (prayer)?'”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

जब मैंने सज्दा के लिए सिर झुकाया, तो ज़मीन से एक आवाज़ आई, जिसने कहा, 'तुम्हारा दिल तो मूर्तियों के प्रेम से ही परिचित है; तुम्हें नमाज़ से क्या मिलेगा?'

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ एक कविता नहीं है, यह एक गहरा आध्यात्मिक संवाद है। शायर एक ऐसे पल का वर्णन कर रहे हैं जब उन्होंने सज्दा किया और ज़मीन से एक आवाज़ आई। यह आवाज़ असल में इंसान के मन की कड़वी सच्चाई है। यह पूछती है कि क्या तुम्हारा दिल, जो तो बस बुतों के प्रेम का आदी है, उसे नमाज़ की सच्चाई का पता चलेगा? यह एक आत्म-मंथन है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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