'इक़बाल' के नफ़स से है लाले की आग तेज़
ऐसे ग़ज़ल-सरा को चमन से निकाल दो
“The fire of the pomegranate is in Iqbal's breath, Remove such a ghazal-writer from the garden.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इक़बाल के नफ़स से लाले की आग तेज़ है, ऐसे ग़ज़ल-साज़ को बाग़ से निकाल दो।
विस्तार
यह शेर शायरी के नवाब, अपनी प्रतिभा पर एक गहरा तंज़ भी है और एक ऐलान भी! शायर कहते हैं कि कविता की ये आग, ये जोश, तो शायर की रूह से आता है। और जब ये आग इतनी तेज़ हो, तो ऐसे कमाल के शायर को महफ़िल या चमन से निकाल देना चाहिए... ताकि वो सिर्फ़ महफ़िल की मिठास में न रह जाए, बल्कि ज़िंदगी की सच्चाई को भी महसूस करे।
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