तेरे नफ़स से हुई आतिश-ए-गुल तेज़-तर
मुर्ग़-ए-चमन है यही तेरी नवा का सिला
“From your breath, a fire of roses has flared, so bright, This garden bird is merely the reward for your grace.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तेरे साँस से गुलाब की आग इतनी तेज़ हुई, कि यह बाग का पक्षी बस तेरी कृपा का इनाम है।
विस्तार
देखिए, शायर यहाँ महबूब के नफ़स (साँस) की ताक़त बयान कर रहे हैं। वो कहते हैं कि बस एक साँस ने तो दिल में ऐसी आतिश लगा दी कि सब कुछ जल गया। और जो छोटा सा तोहफ़ा या खुशी हमें मिलती है—वो तो बस एक मुर्ग़़-ए-चमन (पिंजरे का पंछी) है। यह हमारी मोहब्बत के सामने बहुत छोटी चीज़ है, यह महबूब की अज़्मत का सिला है!
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