ख़ल्वत की घड़ी गुज़री जल्वत की घड़ी आई छुटने को है बिजली से आग़ोश-ए-सहाब आख़िर

“The hour of seclusion has passed, the hour of manifestation is near; from the embrace of the cloud at last, the lightning prepares to appear.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

एकांत का समय बीत चुका है और सबके सामने प्रकट होने की घड़ी आ गई है; आखिरकार बादलों की गोद से बिजली बाहर निकलने ही वाली है।

विस्तार

यह शेर खामोशी और तैयारी के दौर के खत्म होने और पूरी चमक के साथ दुनिया के सामने आने का पैग़ाम देता है। जैसे बिजली बादलों की आगोश में छिपकर अपनी ताक़त जुटाती है और फिर आसमान पर रौशनी बनकर कौंध जाती है, वैसे ही अब तन्हाई का वक़्त बीत चुका है। शायर कहते हैं कि अब ख़ुद को छुपाए रखने का नहीं, बल्कि महफ़िल और मैदान-ए-अमल में उतरकर अपने वजूद की चमक बिखेरने का समय आ गया है।

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