ख़मोशी और गोयाई मेरी इक इक से बेहतर है — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

ख़मोशी और गोयाई मेरी इक इक से बेहतर है सुकूनत में ये क़तरा हो गुहर तो जोश में दरिया

“My silence and my speech—each one is better than the other: at rest this drop becomes a pearl, in passion's surge a sea.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

मेरी ख़ामोशी और मेरा बोलना, दोनों एक से बढ़कर एक हैं; ठहराव में यह बूँद मोती बन जाती है और जोश में दरिया।

विस्तार

शायर अपनी दो बातों पर धीरे से गर्व करता है: अपनी ख़ामोशी पर और अपने बोलने पर। दोनों एक-दूसरे से बेहतर हैं, हर एक अपनी जगह ख़ास है। जब वह शांत और स्थिर रहता है, तो उसकी ख़ामोशी उस बूँद जैसी है जो क़ीमती मोती बन गई हो। और जब वह जोश में आकर बोलता है, तो उसके शब्द किसी बड़े दरिया की तरह बहते हैं। यानी चाहे वह चुप रहे या खुलकर कहे, दोनों में सुंदरता और मूल्य है। ख़ामोशी उसे गहराई और निखार देती है, और जज़्बा उसे ताक़त और रवानी देता है। यह संतुलन की एक प्यारी तस्वीर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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