वो हद कम-ज़रफ़ हैं जो एक साग़र में बहकते हैं — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

वो हद कम-ज़रफ़ हैं जो एक साग़र में बहकते हैं नहीं क़तरा भी याँ हंगाम-ए-नोशा-नोश में दरिया

“They are the utterly shallow who stagger at a single cup; / here, in the hour of endless drinking, not even a drop makes me a flooded river.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

वे बेहद कमज़र्फ़ हैं जो एक ही प्याले में बहक जाते हैं; यहाँ तो लगातार पीने के समय में एक बूँद भी मुझे नदी की तरह उमड़ने नहीं देती।

विस्तार

यह शेर उन लोगों पर हल्का सा व्यंग्य करता है जो बस एक प्याले से ही बहक जाते हैं। शायर कहते हैं कि ऐसे लोग कम-ज़रफ़ यानी छोटे दिल वाले होते हैं, क्योंकि सिर्फ़ एक घूँट से लड़खड़ाना कमज़ोरी की निशानी है। जो इंसान सचमुच गहरा और बड़े दिल वाला होता है, उसके लिए तो शराब का पूरा दरिया भी एक बूँद के बराबर है। असल बात भीतरी मज़बूती और चरित्र की गहराई की है। बड़ा दिल हर हाल में स्थिर रहता है, जबकि छोटा दिल ज़रा सी बात से घबरा जाता है। यहाँ शराब ज़िंदगी के अनुभवों और भावनाओं का प्रतीक है, जो हमें परखते हैं।

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