देखा जो मुझ ग़रीब को बू-ए-अदम के कोस — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“When the fragrance of oblivion beheld this poor wretch of mine, It fled—for ages it had longed to leave its native land behind.”
अर्थ
जब अदम (शून्यता) की सुगंध ने मुझ जैसे ग़रीब को देखा, तो वह भाग निकली; बहुत समय से वह अपने वतन से निकलना चाहती थी।
विस्तार
शायर खुद को एक ग़रीब, थका हुआ मुसाफ़िर बताता है, जो अरसे से अपने वतन से दूर है। फ़ना यानी मौत के निशान या पैग़ामबर उसे देखते और पहचानते हैं। मानो वे कहते हैं कि यह अकेला भटकता हुआ इंसान तो बहुत पहले ही अपने घर से निकल चुका था, इसलिए किसी हद तक वह पहले से ही उस पार की दुनिया का है। इसमें एक नरम उदासी है। शायर हर जगह अजनबी महसूस करता है, दूरी और तड़प से टूटा हुआ। मौत उसे डराती नहीं, बल्कि एक लौटने जैसी लगती है, जैसे बरसों भटकने के बाद घर वापसी हो। यह जुदाई, मौत और अपने असली ठिकाने से दूर रहने के दर्द पर एक शांत सोच है।
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