जब मय-कदा छुटा तो फिर अब क्या जगह की क़ैद
मस्जिद हो मदरसा हो कोई ख़ानक़ाह हो
“When the tavern's left, what restriction of place can remain?Be it mosque, or madrasa, or a khanqah's domain.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जब मय-कदा छूट गया, तो फिर जगह की क्या पाबंदी? चाहे वह मस्जिद हो, मदरसा हो या कोई ख़ानक़ाह हो.
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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