तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो
मुझ को भी पूछते रहो तो क्या गुनाह हो
“You know your ways, whatever custom you share with others,Why would it be a sin to ask about me too?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुम्हें मालूम है कि तुम्हारे दूसरों के साथ क्या रिश्ते या रस्म-ओ-रिवाज हैं। मुझे भी पूछते रहो तो इसमें क्या गुनाह होगा?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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