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तस्कीं को हम रोएँ जो ज़ौक़-ए-नज़र मिले हूरान-ए-ख़ुल्द में तिरी सूरत मगर मिले

We wouldn't cry for solace, if the joy of sight we found, Provided that your face among heaven's houris were unbound.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हम सांत्वना के लिए नहीं रोएँगे, अगर हमें देखने का सुख मिले, बशर्ते स्वर्ग की अप्सराओं में भी हमें तुम्हारा चेहरा देखने को मिले।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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