शौक़ हर रंग रक़ीब-ए-सर-ओ-सामाँ निकला
क़ैस तस्वीर के पर्दे में भी उर्यां निकला
“Desire, in every form, proved foe to all one's gain;Qais, even in the painted veil, appeared stripped bare and plain.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
शौक़ हर रूप में व्यक्ति के समस्त साधनों और व्यवस्था का दुश्मन साबित हुआ। क़ैस तो तस्वीर के पर्दे में भी नग्न ही नज़र आया, जिससे उसका संसार से पूर्ण विरक्ति का भाव प्रकट होता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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