वाँ हुजूम-ए-नग़्मा-हाए साज़-ए-इशरत था 'असद'
नाख़ुन-ए-ग़म याँ सर-ए-तार-ए-नफ़स मिज़राब था
“There, O Asad, was a multitude of joy's melodious strains;Here, grief's nail was the plectrum to breath's fragile strings.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वहाँ, ऐ 'असद', आनंद के संगीत वाद्यों से निकलने वाले नगमों का हुजूम था। यहाँ, ग़म का नाख़ुन साँस के तार पर मिज़राब का काम कर रहा था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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