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शब ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी रुस्तख़ेज़-अंदाज़ा था
ता-मुहीत-ए-बादा सूरत ख़ाना-ए-ख़म्याज़ा था

Last night, the yearning for the cup-bearer, its intoxicating sway, was of Doomsday's measure,

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बीती रात, साक़ी की चाहत का नशा क़यामत के समान गहरा था। शराब का पूरा विस्तार एक अंतहीन जम्हाई के घर जैसा था, जो अत्यधिक और असीम थकान का संकेत था।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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