न औरों की सुनता न कहता हूँ अपनी सर-ए-ख़स्ता दुश्वार-ए-वहशत सलामत

“I heed no words of others, nor speak of my own grief; long live this weary head, bearing madness past relief.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं न दूसरों की बातें सुनता हूँ और न अपना हाल किसी से कहता हूँ; मेरा यह थका-हारा सिर और दीवानेपन की यह कठिन वहशत सलामत रहे।

विस्तार

इस शेर में शायर दुनिया से पूरी तरह कटकर अपने ही भीतर सिमट गया है—न वह किसी की नसीहत सुनता है, न अपने दिल का हाल किसी को बताता है। वह तो बस अपने इस थके और ज़ख्मी सिर की सलामती की दुआ करता है, जो दीवानगी और जुनून का भारी बोझ अकेले ढो रहा है। यह उस तन्हाई का खूबसूरत बयान है जहाँ इंसान का अपना दर्द और वहशत ही उसकी सबसे वफ़ादार साथी बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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