इस चमन में रेशा-दारी जिस ने सर खेंचा 'असद'
तर ज़बान-ए-लुत्फ़-ए-आम-ए-साक़ी-ए-कौसर हुआ
“In this garden of rootedness, Asad, he who pulled his head away,By Kausar's Saqi's universal grace, his tongue was blessed that day.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे असद, इस संसार रूपी चमन में जिसने सांसारिक बंधनों से स्वयं को अलग किया, उसकी ज़बान साक़ी-ए-कौसर की आम कृपा से तर हो गई।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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