ज़ोहद गरदीदन है गर्द-ए-ख़ाना-हा-ए-मुनइमाँ
दाना-ए-तस्बीह से मैं मोहरा-दर-शश्दर हुआ
“Asceticism is now to roam the wealthy's dusty ways,It was the rosary's bead that trapped me in a six-sided maze.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अब ज़ोहद सिर्फ़ अमीरों के घरों की धूल फाँकना बन गया है। तस्बीह के दाने ने ही मुझे एक ऐसी छह-तरफ़ा उलझन में फँसा दिया है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
