गदा समझ के वो चुप था मिरी जो शामत आई
उठा और उठ के क़दम मैं ने पासबाँ के लिए
“He was silent, taking me for a beggar, when my misfortune arrived,I rose, and rising, stepped towards the doorkeeper.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वह मुझे भिखारी समझकर चुप था, जब मेरी शामत आई। मैं उठा और उठकर मैंने द्वारपाल की ओर कदम बढ़ाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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