फ़लक न दूर रख उस से मुझे कि मैं ही नहीं दराज़-दस्ती-ए-क़ातिल के इम्तिहाँ के लिए

“O fate, keep me not far from her, for I am not even, For the tyrant's long reach, a trial to be given.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

कवि भाग्य से विनती करता है कि उसे अपने प्रिय से दूर न रखे। वह कहता है कि वह अत्याचारी की लंबी पहुँच (यानी जुदाई के कष्टों या क्रूर परिस्थितियों) की परीक्षा को सहन करने में भी सक्षम नहीं है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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