Sukhan AI
ख़ार ख़ार-ए-अलम-ए-हसरत-ए-दीदार तो है शौक़ गुल-चीन-ए-गुलिस्तान-ए-तसल्ली सही

The prick of pain from longing for a glimpse, it does remain;Though my desire may not pluck solace from comfort's flowery domain.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

दीदार की हसरत का चुभने वाला दर्द तो मौजूद है, भले ही मेरी चाहत तसल्ली के बाग़ से सुकून न चुन पाए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.