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कब फ़क़ीरों को रसाई बुत-ए-मय-ख़्वार के पास तो बने बू दीजिए मयख़ाने की दीवार के पास

When can mendicants approach the wine-drinking idol (beloved)? At least grant them the scent near the tavern's wall.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

फ़क़ीर जानना चाहते हैं कि वे शराब पीने वाले महबूब (बुत) के पास कब पहुँच सकते हैं। यदि सीधा पहुँचना संभव न हो, तो वे कम-से-कम मयख़ाने की दीवार के पास उसकी महक ही चाहते हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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