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'ग़ालिब' हमें न छेड़ कि फिर जोश-ए-अश्क से
बैठे हैं हम तहय्या-ए-तूफ़ाँ किए हुए

Ghalib, provoke me not, for with a renewed surge of tears,I sit here, prepared to unleash a tempest.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ग़ालिब, हमें परेशान मत करो क्योंकि आँसुओं के उमड़ते हुए जोश के साथ हम फिर से तूफ़ान लाने की तैयारी में बैठे हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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