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इक नौ-बहार-ए-नाज़ को ताके है फिर निगाह चेहरा फ़रोग़-ए-मय से गुलिस्ताँ किए हुए

My gaze once more pursues a new spring of allure, A face made a garden by wine's radiant hue.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरी निगाह फिर एक नई नाज़ की बहार को देख रही है, जिसका चेहरा शराब की चमक से गुलिस्तान जैसा बना हुआ है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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