Sukhan AI
फिर चाहता हूँ नामा-ए-दिलदार खोलना
जाँ नज़्र-ए-दिल-फ़रेबी-ए-उनवाँ किए हुए

Again I wish to open the beloved's letter,My life offered to the captivating charm of its title.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं फिर से महबूब का खत खोलना चाहता हूँ, अपनी जान को उसके शीर्षक की दिलकश ख़ूबसूरती पर क़ुर्बान किए हुए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.