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जोश-ए-जुनूँ से कुछ नज़र आता नहीं 'असद' सहरा हमारी आँख में यक-मुश्त-ए-ख़ाक है

In passion's frenzy, Asad, nothing is seen;The desert in our eyes is but a handful of dust.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जोश की दीवानगी में, असद, कुछ भी दिखाई नहीं देता। हमारी आँखों में तो रेगिस्तान भी बस मुट्ठी भर धूल जैसा लगता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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