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सर पा-ए-ख़ुम पे चाहिए हंगाम-ए-बे-ख़ुदी रू सू-ए-क़िबला वक़्त-ए-मुनाजात चाहिए

My head should be at the wine-jar's foot, in moments of ecstasy's embrace;My face towards the Qibla turns, when it's time for prayer's grace.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बेखुदी के क्षणों में सर शराब के घड़े के पाँव पर होना चाहिए। और दुआ मांगने के समय चेहरा क़िबले की ओर होना चाहिए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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