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कुछ तो दे ऐ फ़लक-ए-ना-इंसाफ़
आह ओ फ़रियाद की रुख़्सत ही सही

O unjust heavens, at least grant me this much,Permission to sigh and to make my pleas.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे अन्यायपूर्ण आसमान, मुझे कुछ तो दे, कम से कम आहें भरने और शिकायत करने की अनुमति ही सही।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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