मेरे होने में है क्या रुस्वाई
ऐ वो मज्लिस नहीं ख़ल्वत ही सही
“What shame is there in my very being?If no great assembly, then solitude's agreeing.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे होने में क्या बदनामी है? यदि कोई बड़ी सभा नहीं है, तो एकांत ही सही है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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