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यार से छेड़ चली जाए 'असद'
गर नहीं वस्ल तो हसरत ही सही

Let flirtation with the beloved continue, Asad, if union is not to be, then longing itself will suffice.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

असद, प्रिय से छेड़छाड़ चलती रहे। यदि मिलन नहीं हो पाता है, तो यही हसरत (लालसा) ही काफी है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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