आए है बेकसी-ए-इश्क़ पे रोना 'ग़ालिब'
किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बला मेरे बा'द
“Ghalib, I weep at the helplessness of love,To whose home will this deluge of woes go after me?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, मुझे इश्क़ की बेबसी पर रोना आता है; मेरे बाद यह मुसीबतों का सैलाब किसके घर जाएगा?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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