रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब'
कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था
“Ghalib, you are not the only master of Rekhta (Urdu poetry);They say, in earlier times, there was also a 'Meer'.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, तुम ही रेख़्ता (उर्दू शायरी) के एकमात्र उस्ताद नहीं हो; कहते हैं कि बीते ज़माने में कोई 'मीर' भी हुआ करता था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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