हरीफ़-ए-वहशत-ए-नाज़-ए-नसीम-ए-इश्क़ जब आऊँ
कि मिस्ल-ए-ग़ुंचा साज़-ए-यक-गुलिस्ताँ दिल मुहय्या हो
“I shall face the wild coquetry of love's breeze, only when My heart, like a bud, is prepared to become a whole garden.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं प्रेम की हवा के उन्मादी नाज़ का सामना तभी करूँगा, जब मेरा दिल एक कली की तरह पूरे बाग़ के लिए तैयार हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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