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जाँ मुतरिब-ए-तराना-ए-हल-मिम-मज़ीद है लब पर्दा-संज-ए-ज़मज़मा-ए-अल-अमाँ नहीं

My soul is the minstrel singing 'Is there any more?'

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरी जान 'क्या और है?' का तराना गाने वाली मुतरिब है। मेरे होंठ 'अल-अमाँ!' (दया/रक्षा!) का ज़मज़मा नहीं गा रहे हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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