है सब्ज़ा-ज़ार हर दर-ओ-दीवार-ए-ग़म-कदा
जिस की बहार ये हो फिर उस की ख़िज़ाँ न पूछ
“Every door and wall of this house of sorrow is a green expanse;If this be its spring, then do not ask of its autumn!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
इस दुख भरे घर का हर दरवाज़ा और दीवार हरी-भरी (सब्ज़-ज़ार) है, यानी हर तरफ़ दुख फैला हुआ है। अगर इसकी बहार (वसंत ऋतु) ऐसी है, तो फिर इसकी ख़िज़ाँ (पतझड़ या बुरा वक्त) की कल्पना भी मत करो, वह कहीं ज़्यादा भयानक होगा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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