Sukhan AI
कब मुझे कू-ए-यार में रहने की वज़्अ याद थी
आइना-दार बन गई हैरत-ए-नक़्श-ए-पा कि यूँ

When did I recall the manner of my presence in the Beloved's street? The wonder of my footsteps became a mirror, revealing my state this way.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मुझे महबूब की गली में अपनी मौजूदगी का अंदाज़ कब याद था? मेरे कदमों के निशान की हैरत ही आईना बन गई और यूँ मेरा हाल ज़ाहिर हो गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.