मैं ने कहा कि बज़्म-ए-नाज़ चाहिए ग़ैर से तही
सुन के सितम-ज़रीफ़ ने मुझ को उठा दिया कि यूँ
“I pleaded, 'Let this proud assembly be from rivals clear,'My witty tormentor, hearing, just dismissed me, 'thus, my dear!'”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैंने कहा कि महबूब की महफिल प्रतिद्वंद्वियों से खाली होनी चाहिए। यह सुनकर उस चतुर ज़ालिम ने मुझे ही यह कहकर हटा दिया कि 'यूँ' (जैसे मैं ही गैर हूँ)।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
