गर्म-ए-फ़रियाद रखा शक्ल-ए-निहाली ने मुझे
तब अमाँ हिज्र में दी बर्द-ए-लयाली ने मुझे
“My pillow's form kept me fervent in my mournful cries,Then the cool nights granted solace in separation's guise.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तकिए की शक्ल ने मुझे फरियाद करने में व्यस्त रखा। तब जुदाई में रातों की ठंडक ने मुझे शांति दी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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