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गर वो मस्त-ए-नाज़ देवेगा सला-ए-'अर्ज़-ए-हाल ख़ार-ए-गुल बहर-ए-दहान-ए-गुल ज़बाँ हो जाएगा

If that beauty, drunk with pride, should bid me speak my plight,The rose's thorn, for the rose's mouth, would turn into a tongue.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर वो नाज़ से मदहोश माशूक़ मेरे हाल बयान करने का बुलावा देगा, तो गुलाब का काँटा गुलाब के मुँह के लिए ज़ुबान बन जाएगा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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