मुश्कीं लिबास-ए-काबा अली के क़दम से जान
नाफ़-ए-ज़मीन है न कि नाफ़-ए-ग़ज़ाल है
“Know that Kaaba's musk-dark raiment, by Ali's sacred tread,Is the earth's very navel, not a gazelle's fragrant bed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जानो कि काबा का मुश्क-रंग लिबास अली के क़दम की वजह से धरती की नाभि है, न कि किसी हिरण की नाभि।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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