किस पर्दे में है आइना-पर्दाज़ ऐ ख़ुदा
रहमत कि उज़्र-ख़्वाह-ए-लब-ए-बे-सवाल है
“O God, in what veil resides the Mirror-Artist's grace?Whose mercy is the advocate for lips that make no case.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ ख़ुदा, वह आइना-पर्दाज़ (दर्पण सजाने वाला) किस परदे में है? यह वह रहमत है जो उन होठों के लिए क्षमा याचना करती है जिनसे कोई सवाल नहीं उठा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
