अंजाम-ए-शुमार-ए-ग़म न पूछो
ये मसरफ़-ए-ता-ब-कय नहीं है
“Of sorrow's tally, ask not the final sum,This endless task, 'till when,' will never come.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दुखों की गिनती का अंजाम मत पूछो। यह ऐसा काम है जिसका कोई 'कब तक' (अंत) नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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