क्यूँ बोते हैं बाग़बान तोंबे
गर बाग़ गदा-ए-मय नहीं है
“Why do gardeners plant these creeping vines,If the garden does not beg for wine?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
बाग़बान तोंबे क्यों बोते हैं, अगर बाग़ शराब का भिखारी नहीं है?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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