जूँ जादा सर-ब-कू-ए-तमन्ना-ए-बे-दिली
ज़ंजीर-ए-पा है रिश्ता-ए-हुब्बुल-वतन हुनूज़
“Like a captive, head bowed in desires devoid of all spirit's cheer,The bond of homeland's love is still a chain, holding us here.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
एक बंदी की तरह, निष्प्राण इच्छाओं की गली में सर झुकाए हुए, वतन से मोहब्बत का रिश्ता अभी भी पैरों की ज़ंजीर है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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