बस-कि वीरानी से कुफ़्र-ओ-दीं हुए ज़ेर-ओ-ज़बर
गर्द-ए-सहरा-ए-हरम ता-कूचा-ए-ज़ुन्नार है
“So vast the ruin, faith and doubt alike lie scattered low;The dust of Haram's desert to the sacred thread-lane does flow.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वीरानी इतनी ज़्यादा है कि कुफ्र और दीन दोनों उलट-पलट गए हैं। हरम के रेगिस्तान की धूल ज़ुन्नार के कूचे तक पहुँच गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
