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दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्या
ज़ख़्म के भरते तलक नाख़ुन न बढ़ जावेंगे क्या

What efforts will my friends make to alleviate my sorrow?Ere my wounds can heal, will not my nails grow long again?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरे दोस्त मेरी ग़म-ख़्वारी में क्या कोशिश करेंगे? ज़ख़्म के भरने तक क्या मेरे नाख़ुन नहीं बढ़ जाएँगे?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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