समझ के करते हैं बाज़ार में वो पुर्सिश-ए-हाल
कि ये कहे कि सर-ए-रहगुज़र है क्या कहिए
“They inquire of my state in the bazaar, knowing well,So I might say, 'It's a public path, what is there to tell?'”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वे बाज़ार में मेरी स्थिति के बारे में जानबूझकर पूछते हैं, ताकि मैं यह कहूँ कि यह तो सार्वजनिक रास्ता है, अब क्या कहा जाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
